बरसात के बाद आसमान में क्यों बनता है इन्द्रधनुष? जानिए इसके पीछे का कारण

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नई दिल्ली/दीक्षा शर्मा। कभी ना कभी बरसात के बाद इन्द्रधनुष तो अपने देखा ही होगा. दरअसल, आसमान में एक साथ सात रंग दिखाई पड़ते हैं. वो सात रंग मिलकर एक इंद्रधनुष बनाते हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर बारिश के बाद आसमान में इन्द्रधनुष कतुर बनता है? इसके पीछे का क्या रहस्य है?

सात रंग का मिलन

आपको बता दें कि सूर्य के प्रकाश में सात प्रकार के रंग मौजूद होते हैं बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल। जिसको संक्षेप में ‘बैनीआहपीनाला’ कहा जाता है. इन रंगों का पता प्रिज्म के माध्यम से चलता है इंद्रधनुष असल में प्रकृति का विजन है. दरअसल पानी की छोटी-छोटी बूंदें पारदर्शी प्रिज्म का काम करती हैं. जो सूर्य का प्रकाश उन से होकर गुजरता है तो वह अलग सात रंगों में डूब जाती है और इसी वजह से हमें इंद्रधनुष दिखाई पड़ता है. इंद्रधनुष में लाल रंग का प्रकाश सबसे ऊपर दिखाई पड़ता है. जबकि बैगनी रंग का प्रकाश सबसे नीचे दिखाई पड़ता है माना जाता है कि बारिश की बूंदों के बीच अगर धूप भी निकली हो तो सूर्य की तरफ मुंह करके देखने पर इंद्रधनुष जरूर दिखाई देता है. हालांकि हमेशा ऐसा होता नहीं है.

कब दिखाई देता है इंद्रधनुष

अक्सर आपको बारिश की रिमझिम बूंदों के बीच अगर धूप भी हो तो सूर्य की तरफ मुंह कर लीजिए, कहीं न कहीं आपको इंद्रधनुष दिखाई पड़ेगा. आप इंद्रधनुष तब देख पाते हैं जब सूरज आपके पीछे होता है और बारिश आगे. इंद्रधनुष तब और साफ दिखाई देता है जब आसमान में काले बादल छाए हों. अक्सर यह देखा जाता है कि इंद्रधनुष सुबह के समय पश्चिम दिशा में और शाम के समय पूर्व दिशा में दिखाई पड़ता है.

दोहरा इन्द्रधनुष

कभी कभी आसमन में एक साथ दो इंद्रधनुष देखने को मिलते हैं. अगर आपने ध्यान से देखा हो तो बीते दिन 31 मई को दिल्ली एनसीआर में एक नहीं बल्कि दो इंद्रधनुष दिखाई दिए थे. दरअसल होता यह है कि एक ही जगह मौजूद बूंदों के बार-बार धूप के संपर्क में आने पर दो इंद्रधनुष दिखाई पड़ते हैं. ये इस तरीके से होता है कि पहले इंद्रधनुष से निकली रंगीन रोशनी जैसे ही सफेद में बदलती है, वैसे ही उसका संपर्क बारिश की दूसरी बूंदों से हो जाता है और प्रकाश फिर से अलग-अलग रंगों में बिखर जाता है, लेकिन यह क्रम उल्टा होता है . यानी एक इंद्रधनुष सीधा दिखता है और एक उल्टा.

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