आज़ादी के इतिहास को झकझोर देने वाली घटना, 1,650 गोलियों ने सब कुछ बदल के रख दिया!

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नई दिल्ली/दीक्षा शर्मा। आज से करीब 100 साल पहले ब्रिटिश हुकूमत ने भारत को एक ऐसा जख्म दिया, जो आज भी सालता है. 13 अप्रैल,1919 यह तारीख़ भारतीय इतिहास के लिए बेहद ही दुखद रहा है. इसी दिन जलियांवला बाग में बेकुसूर लोगों को 1,650 गोलियों के हवाले कर दिया था. और उन गोलियों ने लाखों लोगों को हमेशा के लिए गहरी नींद में सुला दिया.

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जलियांवाला बाग हत्याकांड

दरअसल, 13अप्रैल 1919 को बैसाखी थी और इसी दिन हजारों लोग रोलेट एक्ट और राष्ट्रवादी नेताओं सत्यपाल एवं डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में एकत्र हुए थे. सभी लोग शांतिपूर्वक और निहत्थे प्रदर्शन कर रहे थे. और कुछ ही समय में वहां लाखो लोग इकट्ठे हो गए. उसके बाद करीब 12:40 बजे जनरल रेजीनल्ड डायर को जलियांवाला बाग में होने वाली सभा की सूचना मिली. डायर अपने साथ 150 सिपाहियों को लेकर जलियांवाला बाग़ पहुंचा और जनरल रेजीनल्ड डायर ने पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओड्वायर के आदेश पर अंधाधुंध गोलियां चला दी. डायर ने अपने सैनिकों के साथ पूरे जलियांवाला बाग़ को घेर लिया. उन सैनिकों ने गोलियों द्वारा कई लोगों को हमेशा के लिए नींद में सुला दिया. जान बचाने के लिए कई औरतें अपने बच्चों के साथ कुएं में कूद गई. और। कुछ समय में ही इस बाग की जमीन का रंग लाल हो गया. यह नरसंहार भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास का एक काला अध्याय है.

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दीवारों पर आज भी हैं गोलियों के निशान

जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश क्रूरता का प्रतीक है. ब्रिटिश सरकार की क्रूरता गोलियों के निशान के रूप में बाग की दीवारों पर आज तक मौजूद हैं. इस घटना में कितने लोगों ने अपनी जान गंवाई है इसका सही सही आंकड़ा नहीं है. लेकिन सरकारी दस्तावजों में मौत का आंकड़ा सिर्फ 380 बताया गया, लेकिन असल में वहां हजारों लोगों की मौत हुई थी. मरने वालों को लेकर कई अलग-अलग रिपोर्ट्स हैं. हालांकि बताया जाता है कि करीब 1650 राउंड फायर किए गए थे जिसमें 1 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को सबसे ज्यादा प्रभावित किया था.

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