Rahasya : क्या आप जानते है एक रात के लिए किन्नर भी करते हैं शादी, अगले दिन हो जाते हैं विधवा…

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नई दिल्ली/दीक्षा शर्मा। Rahasya) भारतीय समाज में आज भी किन्नरों को एक अलग नज़रिए से देखा जाता है,उनकी एक अलग पहचान बनाई गई है. इसलिए किन्नर समुदाय अपनी एक अलग दुनिया में रहता है. हालंकि किन्नर भी आपकी और हमारी तरह एक आम इंसान है लेकिन, इनकी ज़िदगी में कई ऐसे रौचक तथ्य हैं, जिनको जानकर आपकी रूह काप उठेगी.

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किन्नरों समुदाय को लेकर हम यह जानते हैं कि इनकी शादी नहीं होती, लेकिन यह ग़लत है. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि किन्नरों की शादी होती है, लेकिन सिर्फ एक रात के लिए. और उसके बाद वह विधवा हो जाते हैं. अब सवाल यह उठता है कि सिर्फ़ एक रात के लिए क्यों और किससे?

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इस देवता से करते हैं शादी

दरअसल, किन्नर समुदाय केवल एक रात के भगवान इरावन से शादी करते हैं. जिन्हें अरावन के नाम से भी जाना जाता है. इरावन भगवान अर्जुन और नाग कन्या उलूपी के पुत्र थे. आपको बता दें कि शादी के दौरान किन्नर समुदाय ख़ुशी के साथ जश्न मनाते हैं, इस दौरान वह अपने देवता इरावन को शहर भृमण पर ले जाते हैं, जहां रास्तेभर वह जश्न मनाते हुए चलते हैं. लेकिन, भृमण से लौटते समय वह इरावन देवता की मूर्ति को तोड़ देते हैं. यह मान्यता है कि मूर्ति के तूटते ही वह किन्नर विधवा हो जाती है जिसकी शादी इरावन देवता से हुई थी.

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महाभारत से जुड़ी है यह मान्यता

कहते हैं कि इस विवाह की शुरुआत के दौरान हुई थी. महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने मां काली की पूजा की थी. इस पूजा के दौरान उनपर किसी राजकुमार की बलि चढ़ाने की शर्त रखी गई. कोई भी राजकुमार अपनी बलि चढ़ाने के लिए तैयार नहीं हुआ. लेकिन, इरावन इस बलि के लिए तैयार हो गया, पर उसकी एक शर्त थी कि वह बलि से पहले विवाह करना चाहेगा. अब सवाल यह था कि एक रात की लिए इरावन से शादी कौन करेगा? इस समस्या के समाधान के लिए भगवान कृष्ण धरती पर प्रकट हुए और मोहिनी रूप धारण कर इरावन से विवाह किया. बलि चढ़ने के बाल मोहिनी विधवा हो गई. इसी कथा को याद करते हुए किन्नर समुदाय इरावन को अपना देवता मानते हैं.

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