नई शिक्षा नीति पर PM मोदी ने बताया कि स्थानीय भाषा पर क्यों किया गया फोकस

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Pm modi
पीएम मोदी

नई दिल्ली/पूजा शर्मा। शुक्रवार को शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने शुरुआती संबोधन देते हुए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपनी बात रखी. पीएम मोदी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जूड़ी खास बाते भी बताई है. अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने कहा कि तीन-चार साल के विचार-मंथन के बाद नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिली है. आज हर विचारधारा के लोग इस मसले पर मंथन कर रहे हैं. आज इस नीति का कोई विरोध नहीं कर रहा है, क्योंकि इसमें कुछ भी एक तरफा नहीं है.

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पीएम ने कहा, हर देश, अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपनी नेशनल वैल्यूज़ के साथ जोड़ते हुए, अपने नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म करते हुए चलता है। मकसद ये होता है कि देश की शिक्षा व्यवस्था, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को फ्यूचर रेडी रखे, फ्यूचर रेडी करे. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है.
उन्होंने आगे कहा कि बीते अनेक वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे. परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना की वैल्यूज़ प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था.

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पीएम मोदी ने कहा कि आज गुरुवर रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है. वो कहते थे – “उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।” निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है. इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है. ये एक बहुत बड़ी वजह है जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, पांचवी तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है.

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उन्होंने बताया कि अभी तक जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, उसमें ‘व्हाट टू थिंक’ पर फोकस रहा है जबकि इस शिक्षा नीति में ‘हाऊ टू थिंक’ पर बल दिया जा रहा है. ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि आज जिस दौर में हम हैं, वहां इन्फोर्मेशन और कंटेट की कोई कमी नहीं है. अब कोशिश ये है कि बच्चों को सीखने के लिए इन्क्वायरी बेस्ड, डिस्कवरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड और एनालिसिस बेस्ड तरीकों पर जोर दिया जाए. इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनका पार्टिसिपेशन भी बढ़ेगा.

पीएम मोदी ने सबोंधन में कहा- उच्च शिक्षा को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट, क्रडिट बैंक के पीछे यही सोच है. हम उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा. इसके लिए उसे निरंतर खुद को रि-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा. जब गांवों में जाएंगे, किसान को, श्रमिकों को, मजदूरों को काम करते देखेंगे, तभी तो उनके बारे में जान पाएंगे, उन्हें समझ पाएंगे, उनके श्रम का सम्मान करना सीख पाएंगे. इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्र शिक्षा और श्रम की गरिमा पर बहुत काम किया गया है.

पीएम मोदी ने आगे कहा, संस्थान और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी ये रिफॉर्म्स रिफ्लेक्ट होंगे, तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा. अच्छी क्वालिटी की शिक्षा का रास्ता इन दोनों मतों के बीच में है. इससे क्वालिटी को प्रोत्साहन मिलेगा….राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अमल में लाने के लिए हम सभी को एकसाथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है. यहां से विश्विद्यालय, कॉलेज, स्कूल शिक्षा बोर्ड, अलग-अलग राज्यों, अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद और समन्वय का नया दौर शुरु होने वाला है.

प्राधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ सर्कुलर जारी करके, नोटिफाई करके लागू नहीं होगी. इसके लिए मन बनाना होगा, आप सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी. भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए आपके लिए ये कार्य एक महायज्ञ की तरह है.

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