हमारे देश का नाम भारत ही क्यों पड़ा? जानिए दिलचस्प तथ्य

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नई दिल्ली/ दीक्षा शर्मा। अभी कुछ दिनों पहले हमारे देश (इंडिया) का नाम बदलने के लिए बहस छिड़ी थी. संविधान में दर्ज “इंडिया दैट इज भारत” (India that is bharat) को बदलकर केवल भारत (Bharat) करने के मांग उठ रही थी. इस बारे में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट (Supreem court) में दाखिल हुई, जिसपर बुधवार को अदालत ने सुनवाई की. याचिकाकर्ता की मांग थी कि इंडिया ग्रीक शब्द इंडिका से आया है और इस नाम को हटाया जाना चाहिए. याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की थी कि वो केंद्र सरकार को निर्देश दे कि संविधान के अनुच्छेद-1 में बदलाव कर देश का नाम केवल भारत करे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया. दरअसल, अदालत ने कहा कि संविधान में पहले से ही भारत का जिक्र है. संविधान में लिखा है ‘इंडिया डैट इज भारत.’ सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस याचिका को संबंधित मंत्रालय में भेजा जाना चाहिए और याचिकाकर्ता सरकार के सामने अपनी मांग रख सकते हैं. यह कोई नई बात नहीं है कई देश अपना नाम बदल चुके हैं. अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार हमारे देश का नाम भारत कैसे पढ़ा?

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भारत के कितने नाम?

प्राचीन समय से भारतभूमि के अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जैसे कि जम्बूद्वीप, भारतखंड, हिमवर्ष, अजनाभवर्ष, भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिन्द, हिंदुस्तान और इंडिया. लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा लोकमान्य और प्रचलित भारत रहा है. नामकरण को लेकर सबसे ज्यादा धारणाएं एवं मतभेद भी भारत को लेकर ही है.

भारत का भौगोलिक इतिहास

हिंद, हिंदुस्तान, इंडिया जैसे नामों में भूगोल उभर रहा है. ऋग्वेद की सांतवी किताब के 18वें श्लोक में ‘दशराजन’ युद्ध यानि कि ‘दस राजाओं के युद्ध’ का वर्णन मिलता है . यह युद्ध दस राजाओं के महासंघ और भरत जनजाति के त्र्त्सू राजवंश के राजा सुदास के बीच लड़ा गया था. यह युद्ध पंजाब में रावी नदी पर हुआ था. इस युद्ध में राजा सुदास ने दस राजाओं के महासंघ पर विजय पाई थी. इस विजय ने राजा सुदास की प्रसिद्धि को कई गुना बढ़ा दिया था और अंतत: लोग खुद को भरत जनजाति के सदस्यों के रूप में जानने लगे थे. इसीलिए, भरत नाम लोगों के मुंह पर रहने लगा और फिर आगे चलकर लोग ‘भारतवर्ष’ या ‘भारत की भूमि’ के नाम से बुलाने लगे.

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भारत के दावेदार कई ‘भरत’

पौराणिक युग में भरत नाम के अनेक व्यक्ति हुए हैं. दुष्यन्तसुत के अलावा दशरथपुत्र भरत भी प्रसिद्ध हैं जिन्होंने खड़ाऊं राज किया. नाट्यशास्त्र वाले भरतमुनि भी हुए हैं. एक राजर्षी भरत का भी उल्लेख है जिनके नाम पर जड़भरत मुहावरा ही प्रसिद्ध हो गया. मगधराज इन्द्रद्युम्न के दरबार में भी एक भरत ऋषि थे. एक योगी भरत हुए हैं. पद्मपुराण में एक दुराचारी ब्राह्मण भरत का उल्लेख बताया जाता है. ग्रंथो के अनुसार, भरत एक चक्रवर्ती सम्राट यानी चारों दिशाओं की भूमि का अधिग्रहण कर विशाल साम्राज्य का निर्माण कर अश्वमेध यज्ञ किया, जिसके चलते उनके राज्य को भारतवर्ष नाम मिला.

दुष्यन्त-शकुंतला के पुत्र भरत

आमतौर पर भारत नाम के पीछे महाभारत के आदिपर्व में आई एक कथा है. महर्षि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका की बेटी शकुंतला और पुरुवंशी राजा दुष्यन्त के बीच गान्धर्व विवाह होता है. इन दोनों का पुत्र हुए जिसका नाम भरत रखा गया. ऋषि कण्व ने आशीर्वाद दिया कि भरत आगे चलकर चक्रवर्ती सम्राट बनेंगे और उनके नाम पर इस भूखंड का नाम भारत प्रसिद्ध होगा.
इतिहास के अध्येताओं का आमतौर पर मानना है कि भरतजन इस देश में दुष्यन्तपुत्र भरत से भी पहले से थे. इसलिए यह तार्किक है कि भारत का नाम किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर न होकर जाति-समूह के नाम पर प्रचलित हुआ.

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