देखिए दुनिया भर में कैसे तय होती है EID की तारीख

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नई दिल्ली/आर्ची तिवारी। ईद के मौके पर गलियों, बाजारों में भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है. लोग मेवे, मिठाईयां, कपड़ों की खरीदारी करते हैं। लज़ीज़ दावतें आयोजित होती है. सब एक-दूसरे से मिलने जाते हैं. लोग ईद के दिन गले मिलते हैं ईदी भी दी जाती है.लेकिन दुनिया भर में मनाने वाले इस त्यौहार की तारीख कैसे निर्धारित होती है जैसे कि आज भारत में ईद है वही कल साउदी अरब में ईद मनाई गई चलिए इस भेद को जानने की कोशिश करते हैं.

चंद्र कैलेंडर होता है जरूरी

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ज्यादातर मुसलमान चंद्र कैलेंडर (lunar calendar) पर विश्वास रखते है, इस कैलेंडर में तारीख का निर्धारण चंद्रमा के अलग-अलग रूपों में दिखाई देने के अनुसार होता है, रमज़ान इस कैलेंडर के नौवें महीने में आता है और हर साल कैलेंडर के हिसाब से 11 दिन का अंतर होता है. दुनिया भर के लगभग 2 अरब मुसलमान रमज़ान के आखिर में चांद देखते हैं. इसी कैलेंडर से न सिर्फ रमज़ान की तारीखों का फैसला होता है बल्कि ईद कब है यह भी इसी कैलेंडर से पता चलता है, इसलिए चंद्र कैलेंडर (lunar calendar) मुसलमानों के लिए बहुत जरूरी होता है।

रोज़ा रखने वाले मुसलमान अगर सौर कैलेंडर पर भरोसा करते तो दुनिया में हर जगह रमज़ान अलग अलग समय और महीनों में मनाया जाता. कोई रमज़ान दिसंबर महीने में मनाता तो कोई जून महीने में. इसलिए दुनिया के ज्यादातर मुसलमान चंद्र कैलेंडर (lunar calendar) के अनुसार ही एकसाथ रमज़ान मनाते हैं। कभी कभी एक साथ बदलती तारीखों की वजह से रमज़ान को लोग अलग अलग मौसम में अनुभव करते हैं.

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सऊदी में ऐसे तय होती है तारीख

सउदी अरब में ईद कब होगी इसका फैसला वहां की आम जनता में से जब कुछ लोग चांद देखते हैं तब तय करते हैं. कई देश साउदी अरब के मुताबिक निर्धारित ईद की तारीख को ही ईद मनाते हैं. वहीं शिया आबादी वाले देश ईरान में सरकार तारीख तय करती है. इराक में एक बार ऐसा हुआ था जब 2016 में पहली बार दोनों समुदायों ने एकसाथ ईद मनाई थी. धर्मनिरपेक्ष देश तुर्की में ईद के दिन का फैसला खगोल विज्ञान के हिसाब से लेता है.

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