कामाख्या मंदिर के चैकाने वाले रहस्य, यहां होती है योनि की पूजा

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नई दिल्ली/दीक्षा शर्मा। भारतीय संस्कृति रहस्यों से भरपूर है .भारत में कई ऐसे रहस्यम और अनछुए पहलू है, जिनके बारे में शायद ही कोई जानता होगा. न ही भारत में प्राचीन मंदिरों में रहस्य की कमी है. भारत में शायद ही कोई ऐसी जगह हो जो कामाख्या मंदिर जितनी रहस्य और मायावी हो. आपको बता दें कि यह मंदिर गुवाहाटी से 8 किमी दूर कामागिरी या नीलाचल पर्वत पर स्थित है. इसे आलौकिक शक्तियों और तंत्र सिद्धि का प्रमुख स्थल माना जाता है. कहा जाता है कि कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. इस मंदिर के बारे में कई अनसुनी कहानियां प्रचलित है.

पुराणों के अनुसार

दरअसल, जहां- जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहा वहा शक्तिपीठ अस्तित्व में आए. यहां सती देवी का योनि भाग गिरा था. यही वजह है कि यह मंदिर सती देवी की योनि का प्रतिनिधित्व करता है. सती देवी के स्वःत्याग से क्रोधित होकर भगवान शिव ने विनाश का तांडव किया था. साथ ही उन्होंने पूरी धरा को नष्ट करने की चेतावनी भी दी थी. इसे देखते हुए भगवान विष्णु ने सती देवी के शरीर को अपने चक्र से 51 टुकड़ों में विभाजित कर दिया. शरीर का हर हिस्सा पृथ्वि के अलग-अलग हिस्से में जाकर गिरा. कामागिरि वह जगह है जहां देवी का योनि भाग गिरा था. यह भी कहा जाता है कि यहां सति देवी भगवान शिव के साथ आया करती थी. इस मंदिर में शक्ति की पूजा योनिरूप में होती है. इस मंदिर में कोई भी देवी मूर्ति नहीं है.
कहते है कि 16वीं सदी में इसे नष्ट कर दिया गया था, फिर कूच बिहार के राजा नर नारायण द्वारा 17वीं सदी में पुन: बनाया गया.

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अंबुवासी मेला

इस मंदिर में प्रतिवर्ष अंबुवासी मेले का भव्य आयोजन किया जाता है. इस मेले में देश भर से साधु संत हिस्सा लेते है. इसी मान्यता है कि अंबुवासी मेले के दौरान माता कामाख्या रजस्वला होती है. कहा जाता है कि माता की महावारी के दौरान मंदिर को 3 दिन के लिए बंद किया जाता है. अगले दिन जब मंदिर खुलता है तो इस दिन विशेष पूजा अर्चना की जाती है.

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कलिका पुराण

‘कलिका पुराण’ में शिव की युवा दुल्हन और मुक्ति प्रदान करने वाली शक्ति को कामाख्या कहा गया है .श्रद्धालुओं  का  विश्वास  है  कि  सती  के  पिता  दक्ष  ने  अपनी पुत्री सती और उस के पति शंकर को  यज्ञ ने अपमानित किया और शिव जी को अपशब्द  कहे .तो उस ने दुःखी हो कर आत्म-दाह कर लिया. शंकर  ने  सती के मृत-देह को उठा कर संहारक नृत्य किया. तब सती के शरीर के 51 हिस्से अलग अलग जगह पर गिरे और वो 51 पीठ के नाम से जाना जाता है. यहां एक प्रथ्वी भीतरी योनि आकृति की दरार है, जिससे एक फुव्वारे की तरह जल निकलता है.

दुर्गा पूजा

हर साल सितम्बर अक्टूबर के महीने में कामाख्या में 5 दिन का दुर्गा पूजा किया जाता है. माता को केवल नर और काले रंग के भैंसे, बकरी, इत्यादि की बलि चढ़ाई जाती है. मनोकामना पूरी करने के लिए यहां लोग कन्या पूजन और भंडारा कराते है.

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तीन हिस्सों में बना है मंदिर

कामाख्या मंदिर को 3 हिस्सों में बनाया हुए है. पहला हिस्सा सबसे बड़ा है, इस हिस्से में हर व्यक्ति को नहीं जाने देते. वहीं दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते है, जहां एक पत्थर से हर वक़्त पानी निकलता है. कहां जाता है कि जब 3 दिन बाद मंदिर खुलता है तो बड़ी घूम धाम से मंदिर के कपाट खोले जाते है.

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