यहां आज भी रास रसाने आते हैं राधा कृष्ण, देखिए रहस्य

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नई दिल्ली/ दीक्षा शर्मा। रहस्यों से भरी भारतीय संस्कृति की एक धार्मिक नगरी वृंदावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र,रहस्यमयी धार्मिक स्थान है. रात होते ही निधिवन का रहस्य गहरा जाता है. दिन में यह जगह जितनी गुलजार रहती है, रात होते ही यहां इंसान तो दूर की बात है, कोई जानवर भी कदम नहीं रखते हैं। मान्यता है कि रात को इस जगह पर राधे श्याम रासलीला करते हैं. खास बात यह है कि रासलीला देखना मना है. इसलिए वन के आसपास घरों में खिड़कियां ही नहीं हैं.

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मथुरा वृंदावन में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. इसी वृंदावन में एक ऐसी जगह भी मौजूद है, जिसे लेकर मान्यता है कि वहां हर रात भगवान श्रीकृष्ण और राधा रास रचाने आते हैं. निधिवन को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनपर विश्वास करना थोड़ा सा कठिन हो जाता है.

ज़मीन की ओर बढ़ते है पेड़

निधिवन में मौजूद पेड़ भी बेहद ख़ास हैं. वैसे आमतौर पर पेड़ों की शाखाएं ऊपर की ओर बढ़ती है. वहीं निधि वन में मौजूद पेड़ों की शाखाएं नीचे की ओर बढ़ती हैं. इन पेड़ों की स्थिति ऐसी है कि रास्ता बनाने के लिए उनकी शाखाओं को डंडों के सहारे फैलने से रोका गया है.

गीली दातून और बिखरा हुआ बिस्तर

निधिवन में मौजूद पंडित बताते हैं कि हर रात भगवान श्री कृष्ण के कक्ष में उनका बिस्तर सजाया जाता है. दातुन और पानी का लोटा रखा जाता है. जब सुबह मंगला आरती के लिए पंडित उस कक्ष को खोलते हैं तो लोटे का पानी खाली, दातुन गिली, पान खाया हुआ मिलता है. इसके साथ कमरा भी पूरा बिखरा हुआ मिलता है.

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आसपास के घरों में नहीं है खिड़कियां

ऐसी मान्यता है कि जो रात में होने वाले भगवान श्री कृष्ण और राधा के रास को देख लेता है वो पागल या अंधा हो जाता है. इसी कारण निधिवन के आसपास मौजूद घरों में लोगों ने उस तरफ खिड़कियां नहीं लगाई हैं. जिन मकानों में खिड़कियां हैं भी, वो शाम सात बजे मंदिर की आरती का घंटा बजते ही बंद कर लेते हैं. कई लोगों ने अपनी खिड़कियों को ईंटों से बंद भी करा दिया है. आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक, शाम सात बजे के बाद कोई इस वन की तरफ नहीं देखता . ऐसा ही एक वाक़या करीब 10 वर्ष पूर्व हुआ था जब जयपुर से आया एक कृष्ण भक्त रास लीला देखने के लिए निधिवन में छुपकर बैठ गया. जब सुबह निधि वन के गेट खुले तो वो बेहोश अवस्था में मिला, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ चूका था. ऐसे अनेकों किस्से हैं जो यहाँ के लोग बताते है.

शाम होते ही ख़ाली कर देते हैं वन

निधिवन में शाम के बाद कोई नहीं जाता.
शाम के बाद जाने वाला व्यक्ति सकुशल वापस नहीं आ पाता हैं क्योकि रात्रि में यहाँ महारास होता हैं. जिसमें राधा-कृष्ण के अलावा उनकी गोपियाँ होती हैं.और कोई भी व्यक्ति इस रास को नहीं देख पता हैं अगर कोई देख ले तो पागल हैं अथवा उसकी मृत्यु हो जाती हैं. ऐसी ही कई भक्तों की कहानियां वहां प्रचलित हैं.

तुलसी के पेड़ बनते है गोपियां

निधि वन की एक बेहद ख़ूबसूरत खासियत यहाँ के तुलसी के पेड़ है.  निधि वन में तुलसी का हर पेड़ जोड़े में है.  इसके पीछे यह मान्यता है कि जब राधा संग कृष्ण वन में रास रचाते हैं तब यही जोड़ेदार पेड़ गोपियां बन जाती हैं. जैसे ही सुबह होती है तो सब फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं. कहा जाता है कि इस वन में लगे जोड़े की वन तुलसी की कोई भी एक डंडी नहीं ले जा सकता है. लोग बताते हैं कि‍ जो लोग भी ले गए वो किसी न किसी आपदा का शिकार हो गए. इसलिए कोई भी इन्हें छूता तक नहीं है.

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रहस्य का असली कारण

वास्तु गुरु कुलदीप सालूजा बताते हैं कि, सच तो यह है, कि निधिवन का वास्तु ही कुछ ऐसा है, जिसके कारण यह स्थान रहस्यमय-सा लगता है और इस स्थिति का लाभ उठाते हुए अपने स्वार्थ के खातिर इस भ्रम तथा छल को फैलाने में वहां के पंडित-पुजारी और गाईड लगे हुए हैं, जबकि सच इस प्रकार है – अनियमित आकार के निधिवन के चारों तरफ पक्की चारदीवारी है. परिसर का मख्यद्वार पश्चिम दिशा में है.

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