क्या आप जानते हैं रामायण और महाभारत से जुड़े इन पंच कन्याओं का रहस्य

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नई दिल्ली/आर्ची तिवारी। हमारे भारतीय इतिहास में रामायण और महाभारत महान ग्रंथ बताए गए हैं हर व्यक्ति इस ग्रंथ का अध्ययन करता है और करना चाहता है रोचकता के मामले में यह दोनों ग्रंथ अव्वल है वही इन दोनों ग्रंथों की अपनी अलग-अलग विशेषताएं है जैसे कि “रामायण में वो सीख है जो हर एक व्यक्ति को अपने जीवन में करना चाहिए वही महाभारत में वो ठीक है जो हर व्यक्ति को अपने जीवन में नहीं करना चाहिए।” इन्हीं ग्रंथों में से पंच कन्याओं का रहस्य शायद ही कोई जानता हो। तो आइए जानते हैं कि पंचकन्या कौन है? और क्या है इनके पीछे की कहानी ?

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पंच कन्याओं का रहस्य

पंच कन्याएं ऐसी कन्या ए होती हैं, जिनकी कभी भी स्त्रियों में गणना नहीं होती। वे शादीशुदा होने के बावजूद भी उन सभी को पवित्र और कन्याओं का रूप माना जाता है। उनके चरित्र पर कभी भी दाग नहीं लगता। माना जाता है की पंच कन्याएं अद्वितीय सुंदर होती हैं। उनकी सुंदरता की तुलना देवताओं की देवियों से की जाती है। इन पंच कन्याओं का वर्णन त्रेता युग की रामायण और द्वापर युग के महाभारत में मिलता है‌। त्रेता युग की रामायण में महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या, सुग्रीव के भाई बालि की पत्नी तारा, और राम के बैरी रावण की पत्नी मंदोदरी को पंच कन्याओं की श्रेणी में रखा गया है। वहीं त्रेतायुग के महाभारत में पांडू पत्नी कुंती और युधिष्ठिर की पत्नी द्रौपदी को पंचकन्या बताया गया है।

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पंच कन्याओं को लेकर क्या है मान्यता

ऐसा माना जाता है कि पंच कन्याएं अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती और द्रौपदी का सुबह-सुबह नाम लेने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

  1. अहिल्या इंद्र से दूषित होने के बावजूद भी उनको दूषित नहीं माना गया, क्योंकि वह पंच कन्याओं की श्रेणी में आती हैं।
  2. वहीं तारा के पति बाली की जब मृत्यु हुई तब उनका विवाह उनके देवर सुग्रीव के साथ करा दिया गया और उसको भी दोष माना नहीं किया क्योंकि वह पंचकन्या थी।
  3. मंदोदरी के साथ भी तारा जैसा ही व्यवहार हुआ। जब रावण राम के हाथों मारे गए तब मंदोदरी का विवाह रावण के छोटे भाई विभीषण के साथ कर दिया गया।
  4. ऐसे ही कुंती ने दानवीर कर्ण को शादी से पहले जन्म दिया था पर वह भी दोष उनका नहीं माना गया क्योंकि वह पंचकन्या थी।
  5. वही भरी सभा में द्रौपदी का वस्त्र हरण हुआ और द्रौपदी खुद 5 पतियों की एक पत्नी थी पर इसका भी शास्त्र या लोगों ने विरोध नहीं कर पाया क्योंकि वह खुद एक पंचकन्या थी और कल पंचकन्या कभी दूषित नहीं होती।

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