लक्ष्मी संग विवाहित होने के बावजूद भी भगवान विष्णु ने क्यों किया तुलसी से विवाह

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नई दिल्ली/ दीक्षा शर्मा। आखि़र क्यों भगवान विष्णु ने तुलसी से विवाह किया, जबकि वो माता लक्ष्मी संग विवाहित थे. अगर हम पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बात करें तो माना जाता है कि भगवान विष्णु की नींद अस्थिर थी. कहते हैं कि भगवान विष्णु 6 महिनों के लिए सोते हैं और बाकी के 6 महिनों के लिए जागते हैं. इसी बात का फायदा असुरों द्वारा उठाया जाता था. एक जालंधर नामक राक्षस ने सभी ऋषि मुनियों को परेशान किया हुआ था. कहा जाता है कि उस राक्षस ने ऋषियों के सारे वेदों को चुरा लिया जिसके कारण सब लोग अज्ञानी हो गए. इस बात से परेशान होकर सभी देव और श्रृषि ने भगवान विष्णु से मिलने का निर्णय लिया. बाद में सभी ऋषि मुनि भगवान विष्णु के पास गए और उस राक्षस के बारे में सब बताया.

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जलंधर का विवाह वृंदा से हुआ

जलंधर नामक शक्तिशाली असुर का विवाह वृंदा नाम की कन्‍या से हुआ था. और वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थी. जालंधर बहुत ही वीर था और उसकी वीरता का रहस्य उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म था. यह सब बात सुनने के बाद भगवान विष्णु ने वृंदा के पतिव्रता धर्म
नष्ट कर दिया. और वहीं दूसरी तरफ जलांधर देवताओं से युद्ध कर रहा था और वृंदा के सतीत्व नष्ट होते ही मारा गया.

वृंदा ने भगवान विष्णु को दिया था श्राप

जालंधर की मौत से दुखी होकर वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्‍थर बन जाने का श्राप दिया. उन्होंने वृंदा का श्राप के लिए खुद को पत्‍थर स्‍वरूप प्रकट किया जो शालिग्राम कहलाया.
इसके बाद वृंदा पति के साथ सती हो गई और उस जगह पर तुलसी का पोधा उत्पन हुआ.

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ऐसे हुए तुलसी का विवाह शालिग्राम से

अपने पति जालंधर की मृत्यु से दुखी वृंदा पति के साथ ही सती हो गई. बाद में वृंदा की राख से तुलसी का पौधा निकला. वृंदा का मान बनाए रखने  के लिए देवताओं ने शालिग्राम स्‍वरूपी विष्‍णु का विवाह तुलसी से करा दिया. जिसे आज हम देवउठनी एकादशी के रूप में मनाते हैं.

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